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राधा यादव ने बांग्लादेश के खिलाफ दिखाया कमाल – फील्डिंग क्वीन ने साबित किया स्पिन का जलवा

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Dinesh

भारत की फील्डिंग क्वीन राधा यादव ने फिर किया सबको प्रभावित

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्पिनर राधा यादव लंबे समय से अपनी फील्डिंग के लिए जानी जाती हैं। इतना कि जब भी किसी प्लेयर को मैदान से बाहर जाना पड़ता है, तो राधा लगभग हमेशा पहले सब्स्टीट्यूट फील्डर के रूप में दिखाई देती हैं।
2025 के महिला वनडे वर्ल्ड कप में भी ऐसा ही हुआ — शुरुआती छह मैचों में राधा को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली, फिर भी वह लगभग हर मुकाबले में बतौर सब्स्टीट्यूट नजर आईं।

Radha Yadav


बांग्लादेश के खिलाफ मिला मौका – और राधा ने दिखाया अपना कमाल

जब आखिरकार भारत ने अपने आखिरी लीग मैच में बांग्लादेश के खिलाफ उन्हें मौका दिया, तो राधा ने दिखा दिया कि वह सिर्फ बेहतरीन फील्डर ही नहीं, बल्कि एक सटीक लेफ्ट-आर्म स्पिनर भी हैं।
बारिश से बाधित मुकाबले में उन्होंने गेंदबाजी की ऐसी लाइन और लेंथ दिखाई जिसने बांग्लादेश की बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

22वें ओवर में उन्होंने सोभाना मोस्तारी को अपनी फ्लाइट और डिप से मात दी — 76 किमी/घं. की रफ्तार वाली गेंद पर मोस्तारी ने ड्राइव करने की कोशिश की और कैच दे बैठीं।
इसके बाद उन्होंने नाहिदा अख्तर और राबेया खान को शानदार तरीके से आउट किया। एक गेंद पर लगभग चौथा विकेट भी मिल जाता, जब नजदीकी DRS कॉल बांग्लादेश के पक्ष में चला गया।


फील्डिंग में भी कमाल – डायरेक्ट हिट से रनआउट किया कप्तान को

राधा ने सिर्फ गेंद से नहीं, फील्डिंग में भी अपने कौशल का प्रदर्शन किया।
उन्होंने बिंदास अंदाज में बांग्लादेश कप्तान निगार सुल्ताना को डायरेक्ट हिट से रनआउट किया — जिसने मैच का रुख ही बदल दिया।

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन में कहा,

“राधा यादव का आज का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने हमें अगले मैच के लिए एक और अच्छा विकल्प दिया है।”


ODI में मुश्किल सफर, लेकिन लगातार मेहनत का फल मिला

राधा यादव की T20 रिकॉर्ड्स हमेशा मजबूत रहे हैं — 2023 में टीम से बाहर होने के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और अब तक 22 T20I में 35 विकेट हासिल किए हैं।
लेकिन ODI में उनका सफर उतना आसान नहीं रहा।
2021 में सिर्फ एक मैच, फिर 2024 में दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के खिलाफ मौका मिला, जहां उन्होंने सात विकेट झटके। इसके बावजूद श्रीलंका ट्राई-सीरीज़ में उन्हें जगह नहीं मिली और युवा लेफ्ट-आर्म स्पिनर शुचि उपाध्याय को डेब्यू मिला।

जब उपाध्याय चोटिल हुईं, तब राधा को इंग्लैंड के खिलाफ वापसी का मौका मिला। वहां तीन मैचों में सिर्फ एक विकेट, और टीम बैलेंस के कारण फिर से उन्हें बाहर बैठना पड़ा।


टेक्निकल सुधार और नई रणनीति से लौटीं मजबूत

2023 में इंटरनेशनल सर्किट से बाहर रहते हुए राधा ने अपने गेम पर काफी मेहनत की।
उन्होंने सिर्फ “स्टंप टू स्टंप” गेंदबाजी छोड़कर ऑफ स्टंप के बाहर की लाइन पर काम करना शुरू किया।
उनकी गेंदों में अब दोनों दिशाओं में ड्रिफ्ट देखने को मिलती है, और वे 70–75 किमी/घं. की रफ्तार से गेंद को फ्लाइट और टर्न दोनों देती हैं।
भारत के बॉलिंग कोच आविष्कार साल्वी ने बताया कि राधा जैसे बॉलर लगातार अपनी स्किल्स सुधार रहे हैं और हर सेशन में बेहतर बनने की कोशिश कर रहे हैं।


सेमीफाइनल से पहले भारत की स्पिन बेंच हुई मजबूत

बांग्लादेश मैच में राधा ने स्नेह राणा की जगह खेला और एन श्री चरनी के साथ डबल लेफ्ट-आर्म स्पिन अटैक बनाया।
दोनों ने मिलकर साबित किया कि भारत की स्पिन बेंच कितनी मजबूत है।
भले ही सेमीफाइनल में राधा को मौका न मिले, लेकिन उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि टीम के पास बैकअप में कितना टैलेंट मौजूद है।


नवी मुंबई में मिली सफलता – ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रणनीति पर नजर

नवी मुंबई में राधा की शानदार गेंदबाजी ने चयनकर्ताओं को एक बड़ा संकेत दिया है।
अब देखना यह होगा कि क्या भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में दोनों लेफ्ट-आर्म स्पिनर (राधा यादव और श्री चरनी) को साथ खिलाने की रणनीति अपनाता है — क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की टॉप चार में सिर्फ दो लेफ्ट हैंडर हैं।


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